Khala Suske ईरानी लोक साहित्य की कहानी में एक बार “खाला सूस्के” (मौसी तिलचट्टी) नामक एक चतुर तिलचट्टी रहती थी । खाला सूस्के बाकी कीड़ों की तरह गंदी जगहों पर नहीं रहती थी। वह बहुत ही साफ-सुथरी थी और उसे सजने-संवरने का बड़ा शौक था।

एक सुबह जब वह जागी, तो उसने सोचा, “अब मेरी उम्र शादी की हो गई है। मुझे दुनिया देखनी चाहिए और अपने लिए एक ऐसा जीवनसाथी ढूंढना चाहिए जो दयालु हो और मेरी कद्र करे।”

सफर की शुरुआत और सुंदर श्रृंगार

खाला सूस्के ने अपनी सबसे सुंदर मखमली फ्रॉक पहनी। उसने अपने पैरों में छोटे-छोटे घुंघरू बांधे और अखरोट के छिलके से एक सुंदर सी टोपी बनाई। वह इतनी चमक रही थी कि कोई कह ही नहीं सकता था कि वह एक छोटा सा कीड़ा है।

वह गुनगुनाती हुई अपने घर से निकल पड़ी।चलते-चलते वह शहर के बाजार में पहुँची। वहाँ सबसे पहले उसकी मुलाकात एक कसाई से हुई।कसाई ने अपनी बड़ी-बड़ी मूंछों पर ताव देते हुए पूछा, “अरे ओ नन्ही परी! तुम इतनी सज-धज कर कहाँ जा रही हो?”खालह सूस्के ने बड़े अदब से जवाब दिया, “मैं अपने लिए एक नेक दिल पति की तलाश में जा रही हूँ।”कसाई ने अपनी भारी आवाज में कहा, “मुझसे शादी कर लो! मेरे पास बहुत सारा मांस है, तुम्हें कभी भूख नहीं रहोगी।”

सूस्के ने मुस्कुराकर पूछा, “ठीक है, पर यह बताओ कि अगर मुझे कभी गुस्सा आ जाए या मैं कोई गलती कर दूँ, तो तुम क्या करोगे ?”कसाई ने अपनी भारी लकड़ी (जिससे वह मांस काटता था) दिखाई और कहा, “मैं इससे तुम्हारी पिटाई करूँगा!”यह सुनकर सूस्के कांप गई। उसने कहा, “तौबा-तौबा! तुम तो बहुत निर्दयी हो। मुझे तुम्हारे जैसे पति की जरूरत नहीं।” और वह आगे बढ़ गई।

रास्ते में उसे एक बेकर मिला। बेकर ने कहा, “मुझसे निकाह कर लो, मैं तुम्हें गरमा-गरम रोटियाँ खिलाऊँगा।”खालह सूस्के ने फिर वही सवाल दोहराया, “अगर मुझे गुस्सा आए, तो तुम क्या करोगे?”बेकर ने अपना जलता हुआ चिमटा दिखाया और कहा, “मैं इससे तुम्हारी खाल उधेड़ दूँगा!”सूस्के ने सिर पकड़ लिया और कहा, “नहीं, नहीं! तुम तो मुझे जला ही दोगे।”

वह फिर से अपनी मंजिल की तलाश में चल पड़ी। इसके बाद उसे एक दरजी मिला, एक सुनार मिला, और यहाँ तक कि एक सिपाही भी मिला। लेकिन सबका जवाब डराने वाला था। कोई उसे कैंची से काटना चाहता था, तो कोई तलवार से डराना चाहता था।खालह सूस्के थोड़ी उदास हो गई। उसने सोचा, “क्या इस दुनिया में कोई ऐसा नहीं है जो मुझसे प्यार से बात करे?”

आगे वह एक सुंदर बगीचे के पास पहुँची। वहाँ एक पुराने पेड़ के नीचे एक बिल था। बिल के बाहर एक बहुत ही शालीन और सभ्य चूहा बैठा था, जिसका नाम था ‘आगा मौश’। आगा मौश ने रेशमी कपड़े पहने थे और वह बड़े ध्यान से एक किताब पढ़ रहा था।जब आगा मौश ने खालह सूस्के को देखा, तो वह खड़ा हो गया और झुककर सलाम किया। उसने बड़े धीमे और मधुर स्वर में पूछा, “ओह! इतनी सुंदर और सलीकेदार खातून, आप इस धूप में कहाँ भटक रही हैं?”सूस्के को उसकी आवाज में एक अजीब सा सुकून महसूस हुआ। उसने शर्माते हुए अपनी पूरी कहानी सुना दी।

आगा मौश ने मुस्कराकर कहा, “अगर आप बुरा न मानें, तो क्या मैं आपका हमसफर बन सकता हूँ ? मेरा घर छोटा है, पर वहाँ शांति बहुत है।”खाला सूस्के ने अपना पुराना सवाल फिर पूछा, “लेकिन आगा मौश, यह बताइए कि अगर मुझे कभी गुस्सा आ गया, तो आप मुझे कैसे सजा देंगे?”आगा मौश ने उसकी आँखों में आँखें डालकर कोमलता से कहा, “अरे! अगर तुम्हें गुस्सा आएगा, तो मैं अपनी पूँछ से तुम्हारे गालों को सहलाऊँगा और तुम्हें तब तक मीठी लोरी सुनाऊँगा जब तक तुम मुस्कुरा न दो।”खाला सूस्के का दिल बाग-बाग हो गया।

उसे वही मिल गया था जिसकी उसे तलाश थी—सम्मान और प्यार।

शादी और एक छोटा सा हादसा

दोनों की धूमधाम से शादी हुई। आगा मौश और खाला सूस्के खुशी-खुशी रहने लगे। आगा मौश हर दिन बाहर जाता और अपनी प्यारी पत्नी के लिए दाने और फल लेकर आता। एक दिन आगा मौश काम से बाहर गया था। खालह सूस्के घर की सफाई कर रही थी। तभी उसे प्यास लगी। पास ही में एक बड़ा सा सूप का बर्तन रखा था।

सूस्के पानी पीने के लिए किनारे पर चढ़ी, लेकिन अचानक उसका पैर फिसल गया और वह सूप के अंदर गिर गई ! वह जोर-जोर से चिल्लाने लगी, “बचाओ! बचाओ ! आगा मौश, जल्दी आओ ! “जब आगा मौश घर लौटा और उसने अपनी पत्नी को मुसीबत में देखा, तो वह घबराया नहीं। उसने तुरंत अपनी लंबी पूँछ सूप के बर्तन में डाली। सूस्के ने पूँछ पकड़ी और आगा मौश ने उसे बाहर खींच लिया। सूस्के थोड़ी भीगी हुई थी और डरी हुई थी, लेकिन आगा मौश ने उसे अपनी पूँछ से पोंछा और बड़े प्यार से कहा, “घबराओ मत, मैं हमेशा तुम्हारे पास हूँ।”

कहानी की सीख

खालह सूस्के और आगा मौश की यह कहानी हमें सिखाती है कि बाहरी सुंदरता से ज्यादा स्वभाव मायने रखता है। सच्चा जीवनसाथी वही है जो आपकी भावनाओं का सम्मान करे और मुश्किल समय में आपका साथ दे। ताकत दिखाने से रिश्ते नहीं बनते बल्कि कोमलता और समझदारी से बनते हैं।आज भी ईरान के घरों में माता-पिता अपने बच्चों को यह कहानी सुनाते हैं ताकि वे जान सकें कि प्यार और सम्मान ही सबसे बड़ी दौलत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *