
एक बार Tío Conejo (चाचा खरगोश) नदी के किनारे घूम रहा था। उसे बहुत भूख लगी थी और नदी के दूसरी तरफ रसीले गाजरों का खेत था। लेकिन समस्या यह थी कि नदी में एक बहुत बड़ा और खूंखार रहता था।
जैसे ही खरगोश नदी के पास पहुँचा, मगरमच्छ ने अपना मुँह खोला और बोला, “आज तो मेरा नाश्ता शानदार होगा! खरगोश, अब तू गया!”खरगोश बिल्कुल नहीं डरा।

उसने अपनी बुद्धि दौड़ाई और बोला, “अरे मगरमच्छ भाई! आप मुझे खाकर अपनी भूख क्या मिटाओगे? मैं तो दुबला-पतला हूँ। क्या आपको पता नहीं कि अल साल्वाडोर के राष्ट्रपति ने आज सभी मगरमच्छों के लिए दावत रखी है?
“मगरमच्छ रुक गया और बोला, “दावत? कैसी दावत?”खरगोश ने गंभीरता से कहा, “हाँ! राष्ट्रपति जानना चाहते हैं कि इस नदी में कितने मगरमच्छ हैं ताकि वह सबको भरपेट खाना भेज सकें।
उन्होंने मुझे गिन्ती (Census) करने के लिए भेजा है।”मूर्ख मगरमच्छ लालच में आ गया। उसने अपने सारे रिश्तेदारों को बुलाया और नदी में एक किनारे से दूसरे किनारे तक एक लंबी लाइन लगा ली।

खरगोश ने मुस्कराते हुए कहा, “शाबाश! अब हिलना मत, वरना गिनती गलत हो जाएगी।”खरगोश पहले मगरमच्छ की पीठ पर कूदा और चिल्लाया— “एक!”फिर दूसरे पर— “दो!”फिर तीसरे पर— “तीन!”ऐसे करते-करते वह मगरमच्छों की पीठ को पुल की तरह इस्तेमाल करके नदी के दूसरे पार पहुँच गया।
सुरक्षित किनारे पर पहुँचकर उसने ऊँची आवाज़ में कहा— “और ये रहा आखिरी मगरमच्छ…21 !”मगरमच्छ चिल्लाया, “गिन्ती पूरी हुई? दावत कब मिलेगी?”

खरगोश गाजर के खेत की तरफ भागते हुए बोला, “दावत तो मिल गई भाई! तुम्हें मूर्ख बनने का मज़ा मिला और मुझे ताज़ा गाजर! अगली बार राष्ट्रपति का इंतज़ार करना!”
सीख (Moral):ताकत से बड़ी बुद्धि होती है। अल साल्वाडोर की कहानियों में अक्सर छोटे जानवर (जैसे खरगोश) अपनी चतुराई से बड़े और ताकतवर जानवरों मात देते हैं।
Clever Rabbit और जादुई पत्थर
अगली भी पारंपरिक लोककथा है! अल साल्वाडोर और मध्य अमेरिका (Central America) के देशों में “Tío Conejo” (चाचा खरगोश) की कहानियाँ बच्चों की जुबान पर रहती हैं। ये कहानियाँ सदियों से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक सुनाई जा रही है
चाचा खरगोश और एक बाघ (Tío Tigre) की एक और बहुत ही प्रसिद्ध और मजेदार कहानी है। यह कहानी सिखाती है कि “डर” को कैसे चतुराई से हराया जाता है।

एक बार बाघ (Tío Tigre) ने चाचा खरगोश को पकड़ लिया। बाघ बहुत भूखा था और उसने जैसे ही खरगोश पर पंजा मारा, खरगोश चिल्लाया:”अरे रुको! रुको! क्या तुम्हें नहीं पता कि आज दुनिया खत्म होने वाली है?”बाघ ठिठक गया और हंसते हुए बोला, “क्या बकवास कर रहे हो? दुनिया कैसे खत्म हो जाएगी?”
खरगोश ने आसमान की तरफ डरते हुए देखा और कहा, “देखो उन बादलों को! क्या तुम्हें महसूस नहीं हो रहा? आसमान गिरने वाला है! मैं तो यहाँ इस बड़ी पहाड़ी के नीचे इसलिए खड़ा हूँ ताकि इसे अपनी पीठ से सहारा दे सकूँ और दुनिया बचा सकूँ। अगर मैं हटा, तो हम सब दब जाएंगे!”बाघ थोड़ा घबरा गया। उसने ऊपर देखा, तेज़ हवा चल रही थी और बादल तेज़ी से भाग रहे थे, जिससे उसे भ्रम हुआ कि शायद सच में आसमान हिल रहा है।

खरगोश ने हाँफते हुए कहा, “बाघ भाई, तुम मुझसे ज़्यादा ताकतवर हो। क्या तुम थोड़ी देर इस पहाड़ को सहारा दोगे? मैं भागकर ज़रा पास के गाँव से कुछ मज़बूत खंभे ले आता हूँ ताकि हम इसे हमेशा के लिए टिका सकें।”बाघ अपनी जान बचाने के चक्कर में मान गया। उसने पहाड़ की एक बड़ी चट्टान पर अपने दोनों पंजे टिका दिए और पूरी ताकत से उसे “रोकने” लगा।
खरगोश वहां से यह कहकर निकला, “बस 10 मिनट संभालना, मैं अभी आया!”एक घंटा बीता, दो घंटे बीते… बाघ की कमर टूटने लगी और पसीने छूटने लगे। उसे लगा कि अगर उसने पंजे हटाए तो आसमान गिर जाएगा। आखिर में जब उससे बिल्कुल सहा नहीं गया, तो उसने सोचा, “मरना तो है ही, कम से कम हाथ हटाकर एक बार देख तो लूँ!”

उसने अपनी आँखें बंद कीं और तेज़ी से वहां से कूदकर भागा ताकि दबने से बच सके। जब वह दूर जाकर रुका और पीछे मुड़कर देखा, तो पहाड़ वहीं था, आसमान भी वहीं था और बादल भी शांत थे।तभी उसे दूर झाड़ियों से चाचा खरगोश के हंसने की आवाज़ आई। खरगोश चिल्लाया— “बाघ भाई! अगली बार अपनी ताकत के साथ थोड़ी अक्ल भी इस्तेमाल करना!”
विशेष बात:अल साल्वाडोर की इन कहानियों में खरगोश को हमेशा “Tricky” (चालाक) दिखाया जाता है और बाघ को “Strong but Silly” (ताकतवर पर मूर्ख)।


