गौतम बुद्ध

भगवान बुद्ध अपने शिष्यों के साथ एक जगह से दूसरी जगह विहार करते रहते थे वह एक गांव में पहुंचे वहां वहां उनकी अच्छा स्वागत किया गया उनके उपदेशों को सुना गया । इसके बाद गौतम बुद्ध ने अगले गांव जाने का फैसला किया जो कि एक जंगल से होकर गुजरता था । गांव वालों ने गौतम बुद्ध को इस जंगल से न होकर जाने की बात कही । गौतम बुद्ध ने इसका कारण पूछा तो गांव वालों ने एक खतरनाक डाकू उंगलीमाल के बारे में बताया वह लोगों को बहुत बेरहमी से मार डालता है और फिर मरे शरीर से उंगली काटकर अपने गले की माला में जोड़ लेता है ।
गौतम बुद्ध ने गांव वालों को कहा कि वह खूंखार डाकू उंगलीमाल से मिलना चाहते हैं,सभी ने उनके साथ जाने से इनकार कर दिया । कोई भी उंगलीमाल से सामना नहीं करना चाहता था क्योंकि उससे मिलने का अर्थ है अपनी जान गंवाना और उसे अपनी उंगली गले में माला के रूप में पहनने का अवसर देना।
गौतम बुद्ध अपने निर्णय पर अटल रहे और उन्होंने अकेले ही जंगल में जाने का फैसला किया । उंगलीमाल भी जंगल में नए शिकार की तलाश में रहता ही था और इस बार उसे गौतम बुद्ध दिखाई दिए । उसने मन में सोचा की जंगल में एक साथ आने में 10 लोग भी डरते हैं मगर यह सन्यासी अकेला ही चल रहा है,शायद से मेरे बारे में ज्ञान नहीं है । उंगली माल तेजी से अपने नए शिकार की ओर बढ़ा । गौतम बुद्ध ने उसे देख लिया मगर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी,केवल शांति से आगे बढ़ते रहे । उंगली माल का शरीर बहुत डरावना था उसके गले में इंसान की कटी हुई उंगलियां की माला साफ दिखाई दे रही थी ।
बुद्ध के चेहरे पर डर का बिल्कुल भी भाव न देखकर उंगलीमाल जोर से चिल्लाया, हे सन्यासी क्या तुम्हें मुझसे डर नहीं लगता ? मैंने कितने ही लोगों को मौत के घाट उतारा है, मेरे गले में लटकी माला में सभी की अंगुलिया जोड़ रखी है ।


बुद्ध बोले “डर किस बात का वैसे भी मनुष्य को केवल उसी से डरना चाहिए जो वास्तव में ताकतवर है ।” उंगलीमाल आश्चर्य में पड़ गया उसे एहसास हुआ कि इस बार वह जिससे बात कर रहा है वह कोई साधरण इंसान नहीं है फिर भी वह अपनी बात पर डटा रहा और बोला मैं बहुत ताकतवर हूं, मैंने कितने लोगों को मार कर उनकी उंगलियां अपने गले में सजा ली है फिर तुम ताकतवर किसे मानते हो ?
बुद्ध ने कहा इस पेड़ से 10 पत्तियां तोड़ कर लाने वाले को । यह सुनकर उंगली माल की हंसी छूट पड़ी और बोला मैं तो पूरा पेड़ उखड़ कर ला सकता हूं । बुद्ध ने कहा पूरा पेड़ उखाड़ने की जरूरत नहीं है । उंगलीमाल एक हाथ में 10 पत्तियां और दूसरे हाथ में तनी हुई तलवार लेकर गौतम बुद्ध के पास पहुंचा । बुद्ध ने बोले, अब इन पत्तियों को जहां से तोड़ा है वही जोड़ आवो ।

यह सुनकर उंगलीमाल का चेहरा सफेद पड़ गया वह बोला यह कैसे हो सकता है ? एक बार पत्तियां टूटने के बाद में वापस पेड़ से नहीं जुड़ सकती हैं । बुद्ध बोले मैं उसे ही ताकतवर मानता हूं जो तोड़ी हुई चीज को वापस जोड़ सकता हो । जब तुम्हारे पास किसी चीज को जोड़ने की ताकत नहीं है तो तुम्हें किसी चीज को तोड़ने का अधिकार भी अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए । यह सुनकर उंगलीमाल को बड़ा पछतावा हुआ, उसे इस बात का एहसास हुआ कि मैं अब तक गलत रास्ते पर था । वह भगवान बुद्ध के पैरों में गिर गया और बोला मैं अब कोई भी ऐसा गलत काम नहीं करूंगा जिसे वापस सही नहीं कर सकता और उस दिन के बाद उसने बुराई का रास्ता छोड़ दिया और आगे चलकर वह बहुत बड़ा सन्यासी बना ।

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