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गुरु पूर्णिमा कब है 2026?

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गुरु पूर्णिमा कब है 2026
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अंतिम अपडेट: जुलाई 2026

विषयजानकारी
पर्व गुरु पूर्णिमा (व्यास पूर्णिमा)
2026 तिथि29 जुलाई, बुधवार
पूर्णिमा प्रारंभ 28 जुलाई शाम 6:18 बजे
पूर्णिमा समाप्त29 जुलाई रात 8:05 बजे
मुख्य पात्रमहर्षि वेद व्यास, भगवान शिव (दक्षिणामूर्ति)
स्रोतपारंपरिक मान्यता, महाभारत परंपरा
पढ़ने का समय 8-9 मिनट
मुख्य सीखगुरु के बिना ज्ञान अधूरा है

वेद व्यास अकेले व्यक्ति थे जिन्होंने 4 वेद बाँटे, महाभारत लिखी और श्रीमद्भागवत रची — फिर भी उन्हें खुद कभी “गुरु” घोषित नहीं किया गया, यह उपाधि लोगों ने श्रद्धा से दी
• क्या आप जानते हैं गुरु पूर्णिमा सिर्फ वेद व्यास का दिन नहीं — इसी तिथि पर भगवान शिव ने भी एक बार बिना एक शब्द बोले सबसे बड़ा ज्ञान दिया था?
• ज़्यादातर लेख सिर्फ पूजा-विधि बताते हैं — कोई नहीं बताता कि वेद व्यास ने महाभारत लिखते समय गणेश जी से क्या शर्त रखी थी

गुरु पूर्णिमा कब है 2026 में ? जवाब है यह 29 जुलाई, बुधवार को मनाई जाएगी (पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई शाम 6:18 बजे शुरू होकर 29 जुलाई रात 8:05 बजे समाप्त होगी, उदया तिथि अनुसार पर्व 29 जुलाई को है)। यह दिन आषाढ़ मास की पूर्णिमा को पड़ता है और इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है — क्योंकि पारंपरिक मान्यता अनुसार इसी तिथि पर महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। लेकिन इस दिन की कहानी सिर्फ एक जन्मदिन तक सीमित नहीं है — यह ज्ञान की उस पूरी परंपरा की कहानी है जिसने भारत को उसके सबसे बड़े ग्रंथ दिए।

Table of Contents

गुरु पूर्णिमा 2026 में कब है? तारीख और शुभ मुहूर्त

गुरु पूर्णिमा का पर्व हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। 2026 में यह तिथि दो दिन फैली हुई है, इसलिए लोगों में असमंजस है:
• पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 28 जुलाई 2026, शाम 6:18 बजे
• पूर्णिमा तिथि समाप्त: 29 जुलाई 2026, रात 8:05 बजे
• उदया तिथि के अनुसार व्रत/पर्व: 29 जुलाई 2026, बुधवार
चूँकि हिंदू पंचांग में जिस दिन सूर्योदय के समय तिथि मौजूद हो, वही तिथि उस दिन मानी जाती है, इसलिए गुरु पूजा और व्रत 29 जुलाई को ही किया जाएगा।

गुरु पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है? वेद व्यास की कहानी

गुरु पूर्णिमा मनाने का मुख्य कारण महर्षि वेद व्यास के प्रति कृतज्ञता है। कहा जाता है कि वेद मूल रूप से एक ही विशाल ज्ञान-राशि थे — इतने विस्तृत कि सामान्य मनुष्य के लिए उन्हें समझना कठिन था। वेद व्यास ने इसी ज्ञान को चार भागों — ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद — में विभाजित किया, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ इसे सहेज सकें। इसी कारण उन्हें “वेदव्यास” नाम मिला और उन्हें आदि-गुरु का स्थान दिया गया।

गणेश जी महाभारत लेखन वेद व्यास कथा
हर श्लोक से पहले एक ठहराव, जिसने महाकाव्य को जन्म दिया


लेकिन वेद व्यास की कहानी यहीं नहीं रुकती। उन्होंने महाभारत जैसा विशाल ग्रंथ भी रचा — एक ऐसी कथा जो आज तक विश्व का सबसे लंबा महाकाव्य मानी जाती है। परंपरागत कथा अनुसार (exact ग्रंथ-स्रोत निश्चित नहीं), जब वेद व्यास ने महाभारत की रचना शुरू की, तो उन्हें एक ऐसे लेखक की ज़रूरत थी जो उनकी गति से बिना रुके लिख सके। उन्होंने भगवान गणेश से यह कार्य करने का निवेदन किया। गणेश जी ने एक शर्त रखी — “मैं लिखूंगा, पर बीच में एक पल भी नहीं रुकूंगा। अगर आप बोलते-बोलते रुक गए, तो मैं लिखना बंद कर दूंगा।”

वेद व्यास ने यह शर्त स्वीकार की, लेकिन साथ ही एक चतुर शर्त भी जोड़ी — “आप जो भी श्लोक लिखेंगे, पहले उसका अर्थ समझकर ही लिखेंगे।” इस तरह जब भी व्यास जी को सोचने का समय चाहिए होता, वे जानबूझकर एक जटिल श्लोक बोल देते, जिसे समझने में गणेश जी को कुछ पल लगते — और इसी बीच वे आगे की रचना मन में तैयार कर लेते थे।
इस कहानी की गहराई यही है कि ज्ञान देने वाला (गुरु) और ज्ञान को आगे बढ़ाने वाला (शिष्य) — दोनों की भूमिका बराबर महत्वपूर्ण है। यही भावना गुरु पूर्णिमा का असली सार है।

क्या भगवान शिव भी गुरु पूर्णिमा से जुड़े हैं?

ज़्यादातर लोग गुरु पूर्णिमा को सिर्फ वेद व्यास जयंती के रूप में जानते हैं, लेकिन एक कम-प्रचलित पारंपरिक मान्यता (exact ग्रंथ-स्रोत निश्चित नहीं, यह परंपरागत कथा अनुसार है) यह भी बताती है कि इसी तिथि पर भगवान शिव ने दक्षिणामूर्ति का रूप धारण किया था। इस रूप में उन्होंने ब्रह्मा जी के चार मानस-पुत्रों — सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार — को वेदों का अंतिम ज्ञान दिया।

गुरु पूर्णिमा कब है 2026


सबसे रोचक बात यह है कि दक्षिणामूर्ति रूप में शिव ने यह ज्ञान बिना एक भी शब्द बोले दिया — सिर्फ मौन और मुद्रा (चिन्मुद्रा) के माध्यम से। जहाँ चारों शिष्य वर्षों तक प्रश्न पूछते रहे, वहीं गुरु का मौन ही उनका सबसे बड़ा उत्तर बन गया। यह कथा हमें सिखाती है कि गुरु सिर्फ शब्दों से नहीं, मौन और आचरण से भी सिखाता है — और यही वजह है कि गुरु पूर्णिमा को सिर्फ “वेद व्यास दिवस” कहना अधूरा है; यह ज्ञान की हर उस परंपरा का उत्सव है जो गुरु से शिष्य तक बहती है।

एकलव्य की गुरुभक्ति

वैसे तो भारतीय इतिहास में महर्षि सांदीपनि व श्रीकृष्ण-सुदामा, समर्थ रामदास व छत्रपति शिवाजी महाराज, आचार्य चाणक्य व चंद्रगुप्त मौर्य, और रामकृष्ण परमहंस व स्वामी विवेकानंद जैसे कई विख्यात गुरु-शिष्य हुए हैं, लेकिन मैं निजी तौर पर शिष्य एकलव्य को बहुत याद रखता हूँ। कथा के अनुसार, एकलव्य जब धनुर्विद्या सीखने गुरु द्रोणाचार्य के पास गया, तो द्रोणाचार्य ने उसे अपना शिष्य बनाने से मना कर दिया था।

दरअसल, द्रोणाचार्य हस्तिनापुर के राजगुरु थे और वे भीष्म पितामह के उस वचन से बंधे थे कि वे केवल कुरुवंश के राजकुमारों को ही शिक्षा देंगे । निराश होने के बजाय, एकलव्य ने जंगल में द्रोणाचार्य की एक मिट्टी की मूर्ति बनाई और बनाई और उसे ही अपना गुरु मानकर अटूट अभ्यास शुरू कर दिया।

एकलव्य गुरु भक्ति द्रोणाचार्य अभ्यास
जब शिष्य के पास गुरु नहीं था, तो उसने मिट्टी में गुरु ढूंढ लिया


एक दिन, द्रोणाचार्य अपने शिष्यों और एक शिकारी कुत्ते के साथ उसी जंगल में आए। कुत्ता भटकते हुए एकलव्य की कुटिया के पास पहुँचा और भौंकने लगा। एकलव्य की साधना में बाधा पड़ रही थी, इसलिए उसने बिना कुत्ते को कोई चोट पहुँचाए, इतनी फुर्ती से बाण चलाए कि कुत्ते का मुँह तीरों से बंद हो गया। जब वह कुत्ता द्रोणाचार्य के पास लौटा, तो वे ऐसा अचूक कौशल देख दंग रह गए। जब वे उस धनुर्धर की खोज में कुटिया तक पहुँचे, तो उन्हें एकलव्य की अद्वितीय गुरुभक्ति का पता चला। तब द्रोणाचार्य ने अपने वचन की रक्षा के लिए गुरुदक्षिणा में एकलव्य का दायाँ अंगूठा मांग लिया, और एकलव्य ने भी बिना किसी झिझक के उसे काटकर गुरु के चरणों में अर्पित कर दिया।

गुरु पूर्णिमा पूजा विधि — क्या करें

• सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें
• अपने गुरु, शिक्षक या मार्गदर्शक को प्रणाम करें और आशीर्वाद लें
• घर के पूजा स्थल में भगवान विष्णु, महर्षि वेद व्यास (और चाहें तो अपने आध्यात्मिक गुरु) का चित्र स्थापित करें
• चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप अर्पित करें
• शाम को चंद्र देव को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें
• श्रीमद्भागवत, भगवद्गीता या रामचरितमानस का पाठ करें

कृष्ण अर्जुन गीता उपदेश विश्वरूप गुरु पूर्णिमा
जब शिष्य ने पूछा, गुरु ने खुद को ब्रह्मांड बनाकर दिखाया

गुरु पूर्णिमा पर क्या दान करें

गुरु पूर्णिमा पर ज़रूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, धन या ज़रूरी वस्तुएं दान करना विशेष पुण्यदायी माना जाता है। जिनके पास प्रत्यक्ष गुरु नहीं हैं, वे देवगुरु बृहस्पति की पूजा और दान कर सकते हैं। विद्यार्थी अपनी पढ़ाई से जुड़ी वस्तुएं (किताबें, कलम) दान करना विशेष शुभ मानते हैं।

बौद्ध और जैन धर्म में गुरु पूर्णिमा का महत्त्व

गुरु पूर्णिमा सिर्फ हिंदू परंपरा तक सीमित नहीं है। बौद्ध मान्यता अनुसार, भगवान बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपना पहला उपदेश आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही सारनाथ में दिया था। इसलिए बौद्ध अनुयायी भी इस दिन को श्रद्धा से मनाते हैं। जैन परंपरा में भी इस दिन आध्यात्मिक गुरुओं का सम्मान किया जाता है। यह दिखाता है कि “गुरु” की अवधारणा भारतीय संस्कृति की एक साझा विरासत है, चाहे धर्म कोई भी हो।

 श्लोक — गुरु की महिमा
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
अर्थ: गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं, गुरु ही महेश्वर (शिव) हैं। गुरु ही साक्षात परब्रह्म हैं — ऐसे गुरु को मेरा नमन है। यह श्लोक बताता है कि गुरु को सृष्टि, स्थिति और संहार तीनों शक्तियों के समान माना गया है, क्योंकि वे अज्ञान को मिटाकर एक नए जीवन का सृजन करते हैं।

सीख

वेद व्यास शिव-दक्षिणामूर्ति और एकलव्य — तीनों कथाएं एक ही बात कहती हैं: ज्ञान चाहे शब्दों से मिले या मौन से,गुरु से प्रत्यक्ष मिले या अप्रत्यक्ष उसे सहेजने और आगे बढ़ाने वाला गुरु ही असली सेतु होता है। गुरु पूर्णिमा हमें यही याद दिलाती है कि जीवन में जिसने भी हमें कुछ सिखाया — चाहे वह शिक्षक हो, माता-पिता हों या कोई मार्गदर्शक — उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना ज़रूरी है।

FAQ

Q1.गूगल, गुरु पूर्णिमा पर छुट्टी होती है क्या?

Ans.गुरु पूर्णिमा एक धार्मिक पर्व है, अधिकतर स्कूल-कॉलेजों में इस दिन विशेष पूजा-कार्यक्रम होते हैं, राष्ट्रीय अवकाश आमतौर पर घोषित नहीं होता (राज्य अनुसार भिन्न हो सकता है)।

Q2.गुरु पूर्णिमा 2026 में कब है?

Ans.गुरु पूर्णिमा 2026 में 29 जुलाई, बुधवार को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई शाम 6:18 बजे शुरू होकर 29 जुलाई रात 8:05 बजे समाप्त होगी, इसलिए उदया तिथि अनुसार पर्व 29 जुलाई को है।

Q3.गुरु पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है?

Ans.गुरु पूर्णिमा महर्षि वेद व्यास के सम्मान में मनाई जाती है, जिन्होंने वेदों को चार भागों में विभाजित किया और महाभारत की रचना की। इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं।

Q4.गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु को क्या देना चाहिए?

Ans.गुरु पूर्णिमा पर गुरु को वस्त्र, फल, मिठाई, दक्षिणा या अपनी श्रद्धा अनुसार कोई भी उपहार भेंट किया जा सकता है। ज़रूरतमंदों को अन्न-वस्त्र का दान करना भी शुभ माना जाता है।

Q5.2025 में गुरु पूर्णिमा कब थी?

Ans.2025 में गुरु पूर्णिमा 10 जुलाई को मनाई गई थी।

Q6.क्या गुरु पूर्णिमा सिर्फ हिंदू त्योहार है?

Ans.नहीं। गुरु पूर्णिमा हिंदू, बौद्ध और जैन — तीनों परंपराओं में मनाई जाती है। बौद्ध मान्यता अनुसार भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश इसी तिथि पर दिया था।

Q7.वेद व्यास और गणेश जी की महाभारत लेखन कथा क्या है?

Ans.पारंपरिक कथा (exact स्रोत निश्चित नहीं) अनुसार वेद व्यास ने भगवान गणेश से महाभारत लिखवाई, इस शर्त पर कि गणेश जी बिना रुके लिखेंगे — बदले में व्यास जी ने शर्त रखी कि हर श्लोक का अर्थ समझकर ही लिखा जाए, जिससे उन्हें सोचने का समय मिलता रहा।

Q8.गूगल, गुरु पूर्णिमा किसका जन्मदिन है?

Ans.गुरु पूर्णिमा को महर्षि वेद व्यास का जन्मदिन माना जाता है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं।

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