“Vasilisa the Beautiful and Baba Yaga” एक रशियन लोक कथा है जो बहुत प्रसिद्ध है,कहानी यूं है कि
बहुत समय पहले रूस के एक गाँव में एक दुकानदार अपने परिवार सहित रहता था। उसकी एक लड़की थी जो बहुत सुंदर थी उसका नाम वासिलिसा था। जब वासिलिसा की उम्र आठ साल हुई,उसी वर्ष उसकी माँ भयंकर बीमार पड़ गई।
अपनी मौत से पहले एक दिन माँ ने वासिलिसा के सिर पर प्यार से हाथ सहलाते हुए उसे एक छोटी सी गुड़िया दी। माँ ने बड़ी धीमी आवाज में कहा, “बेटी, इस गुड़िया को हमेशा अपने साथ रखना और किसी से भी इसके बारे में जिक्र मत करना । जब भी तुम किसी समस्या में फंस जाओ तब इसे कुछ खाने को देना और इसे मुसीबत का हल पूछना, यह तुम्हें जरूर सही रास्ता बताएगी।”
दुर्भाग्य से मां के मरने के कुछ समय पश्चात् बाद वासिलिसा के पिता ने दूसरी शादी कर ली । नई मां की अपनी भी दो बेटियाँ हो गई । मां और दोनों बेटियां वासिलिसा के प्रति बहुत ईर्ष्यालु और निर्दयी थी। वे वासिलिसा की सुंदरता से बहुत जलती थी । वे उससे दिन भर काम करवाती,परेशान करती ताकि जीवन से परेशान हो जाए । दुःख व थकान से वासिलिसा काली और बदसूरत हो जाए।
ज्यादा परेशान होने पर वह पिता के पास गई लेकिन पिता सब कुछ जानते हुए भी अपने नए परिवार से वासिलिसा को बचा पाने में असमर्थ थे । एक दिन तंग आकर वासिलिसा ने मां की दी हुई गुड़िया निकाली और उसे खाना दिया और गुड़िया से अपनी समस्या सांझा की ।

उसी रात से गुड़िया की मदद से वासिलिसा सारा काम भी निपटा लेती और फिर से दिन-ब-दिन सुंदर होती गई। अब पूरा गांव उसकी सुंदरता और मेहनतकश होने की बातें करने लगा । एक बार रात में बदमाश मां और बेटियों ने छुप कर देखा तो उन्हें वासिलिसा की गुड़िया और उसके काम पूरा कर लेने का रहस्य पता लग गया । सौतेली माँ को अपनी ओर बेटियों की चिंता सताने लगी । वह जानती थी कि पवित्र शक्तियों से सीधा टक्कर लेना उसके बस की बात नहीं इसलिए उसने कोई नई योजना बनाने का निर्णय लिया और एक बार चुप हो गई ।
इसी बीच वासिलिसा के पिता को व्यापार के चलते कुछ समय के लिए दूसरे शहर जाना पड़ा। अब सौतेली माँ ने वासिलिसा से छुटकारा पाने की योजना पर काम शुरू किया । उसने पूरे घर की मोमबत्तियाँ और आग बुझा कर वासिलिसा से कहा, “हम सब अंधेरे और ठंड से मर जायेंगे इसलिए आग का इंतजाम करना होगा । जाओ, जंगल में बाबा यागा के घर से आग लेकर आओ”
बाबा यागा एक भयानक जादूगरनी थी उससे बड़े बड़े आदमियों को भी डर लगता था । वासिलिसा ने अपनी सहेलियों से सुना था कि यागा का घर मुर्गी के पैरों पर टिका था । उसकी तीखी नाक थी और वह उड़ने वाले ओखल में सवारी करती थी।
वासिलिसा डरते हुए जंगल में घुस गई। थोड़ा आगे जाने पर उसे तीन घुड़सवार जो दिखे—एक सफेद (सुबह का प्रतीक), एक लाल (सूरज का प्रतीक), और एक काला (रात का प्रतीक)। ये बाबा यागा के सेवक थे जो उसके राज्य की रखवाली करते थे । उन्होंने वासिलिसा को आगे जाने दिया वे जानते थे कि छोटी लड़की एक जादूगरनी का क्या बिगाड़ लेगी अपितु भोजन ही बनेगी ।

जब वह बाबा यागा के पास पहुँची यह देखकर और डर गई कि जादूगरनी का घर में तो इंसानी हड्डियों से सजावट थी । बाबा यागा जो एक इंसानी खोपड़ी के साथ बैठी थी,ने लगभग चिल्लाते हुए पूछा, “तुम कौन हो और यहाँ कैसे आई ?” वासिलिसा ने कांपती हुई आवाज में कहा, “मेरी सौतेली माँ ने आग मंगवाई है।”
बाबा यागा यह सुनकर थोड़ी मुस्कराई और बोली “ठीक है, लेकिन इसके लिए तुम्हें मेरे कुछ काम करने होंगे । यदि तुम मेरे वे काम पूरे कर पाई तो तुम्हे इनाम में आग दे दूंगी और न कर पाई तो तुझे इसी आग में पका कर खा जाऊंगी ।”
बाबा यागा ने वासिलिसा को मुसीबत भरे काम देने शुरू कर दिए जो असंभव हो । उसे उसी रात एक बहुत बड़ी अनाज की गोदाम में भेजा जहां पहले उसे सफाई करनी थी और फिर अनाज के ढेर से सड़े हुए दाने अलग करने थे। वासिलिसा पहले तो रोने लगी, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी । उसने अपनी गुड़िया निकाली और अपने कपड़ों में छिपाया खाना गुड़िया को खिलाया ।
गुड़िया बोल पड़ी, ” प्रिय वासिलिसा हिम्मत रखो,अब कुछ खाओ और सो जाओ।” अगले दिन वासिलिसा के जागने से पहले गुड़िया ने सारा काम पूरा कर दिया।
अगली रात , बाबा यागा ने उसे मिट्टी से भरे पोस्त के दानों को साफ करने का काम सौंपा ओर सोने के लिए चली गई । रात गहराने पर चमत्कारी गुड़िया ने अपना जादू दिखाया और सारे दाने साफ कर दिए । सारा काम पूरा हुआ देख बाबा यागा हैरान हुई कि वासिलिसा इतनी जल्दी और कठिन से कठिन काम कैसे कर लेती है।
उसने पूछा, “तुमने ये सब इतनी जल्दी कैसे कर लिया ?” वासिलिसा डरते हुए बोली, “मेरी माँ के आशीर्वाद से।”

Vasilisa the Beautiful and Baba Yaga
आशीर्वाद’ शब्द सुन कर ही बाबा यागा को गुस्सा आ गया क्योंकि वह पवित्र चीजों से नफरत करती थी। अपनी जादुई शक्ति से बाबा यागा को समझते देर न लगी कि वह कोई पवित्र शक्ति के साथ है । उसे लगने लगा कि दिव्य शक्ति को साथ रखने वाली लड़की को यहां ज्यादा रोकने से उसे खुद खतरा हो सकता है । उसने चिल्लाकर कहा, “यहाँ से निकल जाओ! मुझे तुम जैसे लोगों की जरूरत नहीं है।”
जादूगरनी के मन में विचार आया कि जिसने भी इस लड़की को यहां भेजा है जरूर ही वह कोई दुश्मन है और नुकसान पहुंचाना चाहेगी इसलिए जल्दी से छुटकारा पाना ही सही होगा । उसने एक खोपड़ी जिसकी आँखों से आग निकल रही थी, उसे एक डंडे पर रखा और वासिलिसा को कुटिल मुस्कान से हंसते हुए अपनी एक सेविका को उसे देने को कहा ।
आग लेकर जब वासिलिसा घर पहुँची तो उस मां ने जादुई खोपड़ी घर में रखी और वासिलिसा को लकड़ियां लेने बाहर भेजा दिया । खोपड़ी की आँखों से निकलने वाली आग ने पूरा घर, उसकी दुष्ट सौतेली माँ और बहनों को जलाकर भस्म कर दिया ।
बाबा यागा की चाल सफल हुई मगर वासिलिसा वासिलिसा ईश्वरीय आशीर्वाद से बच गई । वासिलिसा ने उस खोपड़ी को ज़मीन में गाड़ दिया और वह शहर चली गई।

शहर में रहकर वासिलिसा ने सूत कातने का काम किया और गुड़िया की मदद से उसने इतना बारीक धागा और सुंदर वस्त्र बनाया कि उसकी चर्चा ज़ार (रूस के राजा) तक भी पहुंची ।जब ज़ार ने वासिलिसा को अपने दरबार में आमंत्रित किया और, उसकी सुंदरता और सरलता पर मोहित हो गया। ज़ार ने वासिलिसा को विवाह का प्रस्ताव दिया और इस प्रकार वह अब रानी बन गई ।
सब कुछ होने के बाद एक दिन उसके पिता उससे मिलने पहुंचे और बड़े खुश हुए । वासिलिसा ने अपनी गुड़िया को हमेशा अपने पास रखा और वे सब सुख-शांति से रहने लगे।
इस कहानी का महत्व:
यह कहानी प्रेरणा देती है कि विनम्रता और बड़ों का आशीर्वाद किसी भी मुसीबत से हमारी रक्षा करता है।

